फलता: भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार देबांग्शु पांडा ने रविवार को फलता विधानसभा सीट पर 1.09 लाख मतों के अंतर से जीत दर्ज की। पांडा को 1,49,666 वोट मिले, जबकि माकपा के शंभू नाथ कुर्मी 40,645 मतों के साथ दूसरे स्थान पर रहे। कांग्रेस उम्मीदवार अब्दुर रज्जाक मोल्ला 10,084 मतों के साथ तीसरे स्थान पर रहे। कुल 2.36 लाख मतदाताओं वाले इस निर्वाचन क्षेत्र में टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान को महज 7,783 वोट मिले।
Related Stories
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल की इस सीट पर दोबारा वोटिंग करवाई गई थी, जिसके नतीजे आज सामने आ जाएंगे। दरअसल 29 अप्रैल को जब इस सीट पर चुनाव हुआ था तो कुछ गड़बड़ियां सामने आई थीं, जिसके बाद इस सीट पर चुनाव आयोग ने दोबारा वोटिंग करवाने का आदेश दिया था।
21 मई को हुई वोटिंग के दौरान क्या रहा था प्रतिशत?
फलता सीट पर 21 मई को दोबारा वोटिंग हुई थी। इस दौरान शानदार वोटिंग परसेंटेज सामने आया था और यहां 86 फीसदी से ज्यादा वोटिंग हुई थी।
टीएमसी के उम्मीदवार जहांगीर खान पीछे हटे, अब किसके बीच मुकाबला?
इस सीट पर टीएमसी के जिस उम्मीदवार जहांगीर खान की सबसे ज्यादा चर्चा थी, उन्होंने दोबारा वोटिंग से पहले ही मैदान छोड़ने का ऐलान कर दिया था। हालांकि उनका नाम ईवीएम में उम्मीदवार के तौर पर दर्ज था। अब फलता में मुख्य मुकाबला 3 उम्मीदवारों के बीच है, जिसमें भाजपा के देबांग्शु पांडा, कांग्रेस के अब्दुल रजाक मोल्ला और CPIM के शंभू नाथ कुर्मी हैं।
हालांकि आधिकारिक तौर पर इस सीट के लिए छह उम्मीदवार मैदान में हैं, लेकिन तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार जहांगीर खान ने पुनर्मतदान से कुछ दिन पहले चुनाव न लड़ने की घोषणा कर दी, जिसे पार्टी ने उनका निजी फैसला बताया।
29 अप्रैल को हुए मतदान के बाद से ही इस निर्वाचन क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ था, जब कई बूथों से शिकायतें सामने आईं कि ईवीएम पर इत्र जैसे पदार्थ और चिपकने वाली टेप लगाई गई थीं। बाद में हुई जांच में यह भी पता चला कि कई मतदान केंद्रों पर लगे वेब कैमरों द्वारा रिकॉर्ड किए गए फुटेज में छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई थी, जिससे बूथ अधिकारियों, पीठासीन अधिकारियों, मतदान कर्मियों और चुनाव पर्यवेक्षकों की भूमिका पर सवाल उठने लगे। इन जांचों के बाद, चुनाव आयोग ने सभी बूथों पर पुनर्मतदान का आदेश दिया था।